अधिकांश पकà¥à¤·à¥€ अपने पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक घरों में रहते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वे पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक सामगà¥à¤°à¥€ से अपनी आवशà¥à¤¯à¤•ताओं और आवासीय अनà¥à¤•ूलन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रूपों और पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥‚पों में बनाते हैं। उनके घरों को हम 'घोंसला' कहते हैं। पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के घरों को, उनकी वासà¥à¤¤à¥à¤•ला, पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥‚प, पà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ सामगà¥à¤°à¥€ आदि को देखना हमेशा दिलचसà¥à¤ª और जानकारीपूरà¥à¤£ होता है। पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के घरों (घोंसलों) का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करके हम वासà¥à¤¤à¥à¤•ला, à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤•ी, जीव विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, रसायन विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, जलवायॠअनà¥à¤•ूलनशीलता, आवास चयन, वायà¥-संचरण, सहजीवन, और पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ (पकà¥à¤·à¥€) वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° के कई पकà¥à¤·à¥‹à¤‚ सहित विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के कई पहलà¥à¤“ं के बारे में सीखते हैं।
कई पकà¥à¤·à¥€ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ (उनमें से कà¥à¤› विलà¥à¤ªà¥à¤¤ होने के कगार पर हैं या खतरे में हैं) मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ सह-असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ और मानव बसà¥à¤¤à¥€ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ आशà¥à¤°à¤¯ सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ पर अपने पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक घर बनाने के लिठअनà¥à¤•ूलित हैं। लेकिन मानवजनित वà¥à¤¯à¤µà¤§à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के कारण पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठघोंसले बनाने के सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ आशà¥à¤°à¤¯ मानव बसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से गायब होते जा रहे हैं। अब समय है कि हम पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की आवासीय आवशà¥à¤¯à¤•ताओं को समà¤à¥‡à¤‚, उनके आवास बनाने के तरीकों को समà¤à¥‡à¤‚ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ आवासीय विकलà¥à¤ª उपलबà¥à¤§ कराने के लिठपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें।