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उप-विषयों

    मिट्टी के रंग

  • विषय-वस्तु:- मिट्टी


    मिट्टी का रंग मिट्टी के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है जिसमें खनिज संरचना, मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ, मिट्टी की उर्वरता, मिट्टी की नमी, जल निकासी आदि के साथ-साथ मिट्टी में  पूर्ववर्ती और वर्तमान ऑक्सीकरण-अपचयन की स्थितियां भी शामिल हैं। मिट्टी के रंग का उपयोग मिट्टी के संस्तरों को विभेदित करने के लिए भी किया जाता है। मिट्टी खनिजों और कार्बनिक सामग्री की उपस्थिति के अनुसार रंगों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित करती है। उदाहरण के लिए, मिट्टी का भूरा/गहरा भूरा/काला होना उसमें कार्बनिक पदार्थ की उपस्थिति को दर्शाता है, जितना गहरा रंग होगा उतना अधिक कार्बनिक पदार्थ होगा। पीला/हल्का भूरा रंग आयरन ऑक्साइड तथा कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्वों की कमी का संकेत देता है; सफेद रंग कैल्शियम और सिलिका की उपस्थिति को इंगित करता है; लाल रंग लोहे की उपस्थिति को इंगित करता है। मिट्टी के सभी रंग गीली स्थिति में गहरे और शुष्क स्थिति में हल्के दिखाई देते हैं, इसलिए मिट्टी का रंग निर्धारण समान परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। सुबह जल्दी और देर शाम को किये गए मिट्टी के रंग के परीक्षण सटीक नहीं होते है। मिट्टी का रंग ‘मुन्सेल रंग आरेख’ का उपयोग करके निर्धारित किया जाता है। इस आरेख  में अलग-अलग रंग दर्शाने वाले खण्डों को ‘मूल रंग (Hue), रंग की गहराई (Value) और रंग तीव्रता (chroma), तीन चरों के अनुसार व्यवस्थित रूप से क्रम से रखा गया है। ‘मूल रंग’ (Hue) रंग वर्णक लाल, पीला, नीला और हरा इत्यादि को इंगित करता है। ‘रंग की गहराई’ (Value) एक पैमाने पर रंग के हल्केपन या गहरेपन को इंगित करता है और रंग तीव्रता (chroma) एक पैमाने पर रंग की तीव्रता को इंगित करता है। इन तीन चरों के संयोजन का उपयोग करके मिट्टी के रंग का वर्णन किया जाता है।

    चित्र: विभिन्न रंग की मिट्टियाँÂ