दा सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾ मिटà¥à¤Ÿà¥€ के कणों के बीच उपलबà¥à¤§ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ है। पौधों की जड़ों, मिटà¥à¤Ÿà¥€ के जीवों की गति, बिल खोदने वाले जानवरों, मिटà¥à¤Ÿà¥€ के à¤à¥€à¤¤à¤° गैसों के विसà¥à¤¤à¤¾à¤°, मिटà¥à¤Ÿà¥€ की मूल सामगà¥à¤°à¥€ के विघटन आदि के कारण छिदà¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ बनते हैं। मिटà¥à¤Ÿà¥€ में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ आकार के छिदà¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ सीधे तौर पर जल धारण कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ (यानी रिकà¥à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जल धारण करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾) को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾ जितनी अधिक होगी जल धारण कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ उतनी ही कम होगी, परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प वाषà¥à¤ªà¥€à¤•रण के माधà¥à¤¯à¤® से मिटà¥à¤Ÿà¥€ के पानी की अधिक हानि होगी, मिटà¥à¤Ÿà¥€ में सूखापन होगा और पौधों के लिठमिटà¥à¤Ÿà¥€ के पानी की कम उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ होगी। à¤à¥‚मिगत जल का रिसाव और पà¥à¤¨à¤°à¥à¤à¤°à¤£ à¤à¥€ मिटà¥à¤Ÿà¥€ की सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है।
पानी जो गà¥à¤°à¥à¤¤à¥à¤µà¤¾à¤•रà¥à¤·à¤£ के विपरीत मिटà¥à¤Ÿà¥€ के छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में जमा रहता है, केशिका जल कहलाता है, यह पौधों के लिठपानी का मà¥à¤–à¥à¤¯ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। मिटà¥à¤Ÿà¥€ के छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में हवा à¤à¥€ होती है जो शà¥à¤µà¤¸à¤¨ के लिठपौधों की जड़ों को ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ में मदद करती है। मिटà¥à¤Ÿà¥€ की सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾ कई तरह से पौधों की वृदà¥à¤§à¤¿ और मिटà¥à¤Ÿà¥€ के जीवित जीवों की गतिविधियों को सहारा देती है।
मिटà¥à¤Ÿà¥€ की संरचना, मिटà¥à¤Ÿà¥€ की बनावट और मिटà¥à¤Ÿà¥€ का जैविक कारà¥à¤¬à¤¨ सीधे छिदà¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। अचà¥à¤›à¥€ तरह à¤à¤¸à¤®à¥à¤šà¥à¤šà¤¯à¤¿à¤¤ मिटà¥à¤Ÿà¥€ में à¤à¤•ल-दाने या कम संरचित मिटà¥à¤Ÿà¥€ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अधिक जगह होगी। चिकनी मिटà¥à¤Ÿà¥€ और चिकनी दोमट मिटà¥à¤Ÿà¥€ में रेतीली मिटà¥à¤Ÿà¥€ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अधिक छिदà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ जगह होगी। कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ मिलाने से मिटà¥à¤Ÿà¥€ में छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ जाती है। गहन कृषि से परती मिटà¥à¤Ÿà¥€ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ की सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾ कम हो जाती है। मिटà¥à¤Ÿà¥€ की परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾ के लिठदोमट मिटà¥à¤Ÿà¥€ या मिटà¥à¤Ÿà¥€ में दोमट सामगà¥à¤°à¥€ सबसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ होती है जो पौधों की जड़ों के विकास के लिठकेशिका जल, वायॠऔर रिकà¥à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ को बनाये रखती है।Â