कृमिघर कृमियों के लिठà¤à¤• कृतà¥à¤°à¤¿à¤® सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ घर है। कृमिघर विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ ऊंचाई, चौड़ाई और लंबाई का पातà¥à¤° होता है, जिसका ऊपरी हिसà¥à¤¸à¤¾ कृमि, मिटà¥à¤Ÿà¥€, पानी और अनà¥à¤¯ आवशà¥à¤¯à¤• सामगà¥à¤°à¥€ को इसमें सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरित करने के लिठखà¥à¤²à¤¾ रखा जाता है और चारों तरफ की दीवारों में से कम से कम à¤à¤• तरफ पारदरà¥à¤¶à¥€ होती है। कृमिघर की सहायता से मिटà¥à¤Ÿà¥€ के कृमियों की आवास सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को समà¤à¤¾ जा सकता है।
यहां हम बता रहे हैं कि कैसे हम केंचà¥à¤“ं को रखने के लिठकृमिघर बना सकते हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बारीकी से देखकर उनके जीवनचकà¥à¤° को समठसकते हैं। केंचà¥à¤ मिटà¥à¤Ÿà¥€ के पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ और कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ करके मिटà¥à¤Ÿà¥€ की विशेषताओं को बनाठरखने में बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। वे मिटà¥à¤Ÿà¥€ को उलटने-पलटने में à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं और उसकी सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾, जल धारण कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾, जल की निकासी और खनिजों के संचलन को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं।
कृमिघर की सहायता से हम देख सकते हैं कि केंचà¥à¤ अपना बिल कैसे बनाते हैं, कैसे à¤à¥‹à¤œà¤¨ करते हैं, कà¥à¤¯à¤¾ खाते हैं, कैसे गति करते हैं, कैसे उतà¥à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¨ करते हैं और à¤à¤•-दूसरे से कैसे संपरà¥à¤• करते हैं आदि।
à¤à¤• कृमिघर
यह à¤à¤• बंद पातà¥à¤° है जिसका शीरà¥à¤· वायॠपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ के लिठऔर केंचà¥à¤“ं, मिटà¥à¤Ÿà¥€ और कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरित करने के लिठखà¥à¤²à¤¾ रखा जाता है।
1. विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की (रेत, गाद, चिकनी, आदि) और विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रंगों वाली मिटà¥à¤Ÿà¥€ तथा विघटित वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ अवशेषों को à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ कीजिà¤à¥¤
2. किसी à¤à¥€ कà¥à¤°à¤® में परत के रूप में मिटà¥à¤Ÿà¥€ के पà¥à¤°à¤•ारों को à¤à¤• के ऊपर à¤à¤• करके पातà¥à¤° में डालें (इन परतों को लगाने का मूल कारण यह देखना है कि जब केंचà¥à¤ इन मिटà¥à¤Ÿà¥€à¤¯à¥‹à¤‚ को बदलते हैं तो मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कà¥à¤¯à¤¾ परिवरà¥à¤¤à¤¨ होते हैं)।
3. विघटित वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ अवशेषों जैसे सूखी पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, जड़ें, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और फलों के छिलके, थोड़ा गाय का गोबर या बकरी की मिंगड़ी आदि को ऊपरी परत में रखें।
4. पातà¥à¤° के अंदर à¤à¤°à¥€ सामगà¥à¤°à¥€ को गीला करने के लिठथोड़ा पानी छिड़कें।
5. पातà¥à¤° में ऊपरी परत पर कà¥à¤› केंचà¥à¤ (आप उनकी संखà¥à¤¯à¤¾ गिन सकते हैं) छोड़ दें।
6. चूà¤à¤•ि केंचà¥à¤ पà¥à¤°à¤•ाश से बचते हैं, इसलिठकृमिघर को या तो ढककर या अंधेरी जगह पर रखना चाहिठताकि केंचà¥à¤“ं को छिपने के लिठमजबूर न होना पड़े और वे पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से गतिविधियाठकर सकें।
7. समय-समय पर कृमिघर को थोड़े समय के लिठरौशनी वाले कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में ला सकते हैं और केंचà¥à¤“ं के वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° का निरीकà¥à¤·à¤£ कर सकते हैं।
8. कृमिघर की पारदरà¥à¤¶à¥€ दीवारें अंदर के à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤•-रासायनिक और जैविक परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को देखने में सहायक होती हैं जैसे कि आप जमीन के ऊरà¥à¤§à¥à¤µà¤¾à¤§à¤° काट को देख रहे हों।
9. सापà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¿à¤• अंतराल पर देखें कि केंचà¥à¤ कितनी गहराई तक पहà¥à¤‚च गठहैं और वे कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ और मिटà¥à¤Ÿà¥€ को कैसे बदल रहे हैं।
10. सापà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¿à¤• अंतराल पर मिटà¥à¤Ÿà¥€ की संरचना और रंग में होने वाले परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को देखें (यह à¤à¥€ देखें कि मिटà¥à¤Ÿà¥€ की कौन सी परत पहले बदल रही है)।
11. देखें कि कà¥à¤¯à¤¾ केंचà¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़ गई है; कà¥à¤¯à¤¾ आप उनके अंडे और लारà¥à¤µà¤¾ à¤à¥€ देख सकते हैं?
12. à¤à¤• या दो महीने में विघटित होने वाली सामगà¥à¤°à¥€ के साथ-साथ मिटà¥à¤Ÿà¥€ को कृमि खाद (वरà¥à¤®à¥€-कमà¥à¤ªà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿ, जिसे जैविक खाद à¤à¥€ कहा जाता है) में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ होते देखा जा सकता है, जो अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• उपजाऊ है और पौधों के विकास के लिठअचà¥à¤›à¤¾ है।
13. à¤à¤• समयावधि में मिटà¥à¤Ÿà¥€ और जैविक सामगà¥à¤°à¥€ के कृमि खाद में परिवरà¥à¤¤à¤¨ को रिकॉरà¥à¤¡ करें (कृमि खाद बनने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾)।
14. आप सामगà¥à¤°à¥€ को उसके पूरà¥à¤£ रूपांतरण हो जाने के बाद बाहर ला सकते हैं और केंचà¥à¤“ं को अलग कर सकते हैं (अब वे संखà¥à¤¯à¤¾ में अधिक हैं और उनके साथ आप अनेकों कृमिघर बना सकते हैं या उनमें से कà¥à¤› को अपने बगीचे की मिटà¥à¤Ÿà¥€ में छोड़ सकते हैं)।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें - परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ में केंचà¥à¤“ं की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ पाई जाती हैं। आप विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कर सकते हैं और पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• का तà¥à¤²à¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• रिकॉरà¥à¤¡ बना सकते हैं। याद रखें, केंचà¥à¤ की पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ आपस में तà¥à¤²à¤¨à¤¾ के बावजूद पà¥à¤°à¤•ृति के साथ-साथ हमारे लिठà¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
आप केंचà¥à¤“ं के अवलोकन को आंकड़ा पà¥à¤°à¤ªà¤¤à¥à¤° में रिकॉरà¥à¤¡ कर सकते हैं। आंकड़ा तालिका का à¤à¤• नमूना यहां दिखाया गया है; आप आवशà¥à¤¯à¤•ता के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अपनी सà¥à¤µà¤¯à¤‚ का आंकड़ा पà¥à¤°à¤ªà¤¤à¥à¤° तैयार कर सकते हैं।
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सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ की संखà¥à¤¯à¤¾ |
मिटà¥à¤Ÿà¥€ की संरचना में परिवरà¥à¤¤à¤¨ |
मिटà¥à¤Ÿà¥€ के रंग में परिवरà¥à¤¤à¤¨ |
केंचà¥à¤“ं की ऊरà¥à¤§à¥à¤µà¤¾à¤§à¤° गहराई |
कृमि खाद बनने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ |
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1. |
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2. |
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आप पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— को अलग-अलग मौसम के दौरान कर सकते हैं और देख सकते हैं कि अवलोकन के लिठतय à¤à¤• ही मानक में आपको अलग-अलग मौसम में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर मिलता है।
आप केंचà¥à¤“ं को कृमिघर में छोड़ने से पहले और कृमि खाद में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ होने के बाद मिटà¥à¤Ÿà¥€ की à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤•-रासायनिक विशेषताओं का परीकà¥à¤·à¤£ कर सकते हैं।
Ø à¤•à¥à¤¯à¤¾ आपने देखा है की केंचà¥à¤“ं में आंखें होती हैं या नहीं? वे गति के दौरान कैसे देखते हैं और कैसे दिशा बदलते हैं?
Ø à¤•à¥à¤¯à¤¾ केंचà¥à¤“ं के फेफड़े होते हैं? वे शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कैसे करते हैं?
Ø à¤•à¥ƒà¤®à¤¿ खाद कà¥à¤¯à¤¾ है? इसका उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ कैसे होता है? यह किस पà¥à¤°à¤•ार संगठित होती है?
Ø à¤•à¥ƒà¤®à¤¿ खाद की बनावट, घनापन, सरंधà¥à¤°à¤¤à¤¾, जल धारण कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ और पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का परीकà¥à¤·à¤£ करें और अपनी सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ मिटà¥à¤Ÿà¥€ के नमूने से समान मापदंडों के लिठतà¥à¤²à¤¨à¤¾ करें।
Ø à¤ªà¤¤à¤¾ करें कि कà¥à¤¯à¤¾ केवल कृमि खाद में पौधा उगाना अचà¥à¤›à¤¾ है या कृमि खाद मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ मिटà¥à¤Ÿà¥€ में उगाना? à¤à¤• पौधे को उगाने के लिठकृमि खाद और मिटà¥à¤Ÿà¥€ का अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ कà¥à¤¯à¤¾ होना चाहिà¤?
आप अपने आंकड़ों का मातà¥à¤°à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• और गà¥à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• रूप से विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ कर सकते हैं और उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ कर सकते हैं।