पानी के अंदर रहने वाले जीवन रूपों के बारे में जानना हमेशा दिलचसà¥à¤ª होता है। जलीय जीवों की पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को खोजने के अलावा और अधिक दिलचसà¥à¤ª है उनकी आकारिकी, शरीर के अंगों और गतिविधियों को जानना, वे कैसे चलते हैं, वे चौबीसों घंटे कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ करते हैं, उनका वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¥¤ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक जल निकायों जैसे नदी, तालाब, à¤à¥€à¤² और महासागरों को देखना और जलीय जीवन के बारे में जानना तब तक संà¤à¤µ नहीं है जब तक हमें उनमें जाने का अवसर न मिले। पानी के बाहर से à¤à¥€ जलीय जीवों को पानी के रंग, गंदलापन, गहराई और परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ समय के अà¤à¤¾à¤µ आदि के कारण अधिकांशतः देखना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है।
जलजीवशाला à¤à¤• विकलà¥à¤ª के रूप में जलीय तंतà¥à¤° के रूप मे काम कर सकता है जहां अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के लिठलाठगठजलीय पादप à¤à¤µà¤‚ जंतॠयà¥à¤•à¥à¤¤à¤¤à¤® परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में आराम से रहते हैं। जलजीवशाला आदरà¥à¤¶ तरीके से उनके लिठà¤à¤• आवास के रूप में काम करता है जिसमें रहने, पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ करने और जीवनचकà¥à¤° की गतिविधियों और अंतःकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को करने के लिठअनà¥à¤•ूल परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होती हैं। à¤à¤• जलजीवशाला में हम पानी के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में रहने वाले जलीय जीवों, उनके शरीर के अंगों, उनके अनà¥à¤•ूलन, गतिविधियों, गति सà¥à¤µà¤°à¥‚प, वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° और जीवन चकà¥à¤° गतिविधियों को आसानी से देख सकते हैं। इसमें हम उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ों, उपà¤à¥‹à¤•à¥à¤¤à¤¾à¤“ं और उनकी अनà¥à¤¤à¤ƒà¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को देख सकते हैं और खादà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला, खादà¥à¤¯ जाल, ऊरà¥à¤œà¤¾ हसà¥à¤¤à¤¾à¤‚तरण, पोषण संरचना, जैवà¤à¥‚रासायनिक चकà¥à¤° आदि की अवधारणाओं को à¤à¥€ समठसकते है, जो कि à¤à¤• पारिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤•ी तंतà¥à¤° के विशिषà¥à¤Ÿ लकà¥à¤·à¤£ हैं।
जलजीवशाला का आकार उपलबà¥à¤§ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ और पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤• घन फीट से लेकर कई घन मीटर या उससे à¤à¥€ अधिक बड़ा à¤à¤µà¤‚ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ आकारों में तैयार किया जा सकता है।