तितलियाठसरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ कीटों में से à¤à¤• हैं जो सà¥à¤¥à¤¿à¤° नहीं रहती हैं और इधर-उधर घूमती रहती हैं। इसलिठकिसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठतितलियों को à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर कà¥à¤› कà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से अधिक समय तक देखना कठिन हो जाता है। उनके वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° पर नजर रखने के लिठवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को लगातार उनका पीछा करने के लिठमजबूर होना पड़ता है। तितली जाल तितलियों को पकड़ने और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कोई नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाठबिना आवशà¥à¤¯à¤• समय तक उनका निरीकà¥à¤·à¤£ करने के लिठà¤à¤• उपयोगी उपकरण है। तितली जाल में à¤à¤• धातॠया लकड़ी का हतà¥à¤¥à¤¾ होता है जिसमें हटाने योगà¥à¤¯ या सà¥à¤¥à¤¿à¤°, मजबूत धातॠका à¤à¤• वलय या तार का घेरा लगा होता है। धातॠया तार के वलय के साथ à¤à¤• लमà¥à¤¬à¤¾ जाल का थैला (आमतौर पर नायलॉन से बना) इस तरह से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होता है कि इसका चौड़ा मà¥à¤‚ह वलय से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होता है और लमà¥à¤¬à¤¾ हिसà¥à¤¸à¤¾ à¤à¤• दूरसà¥à¤¥ संकीरà¥à¤£ बंद सिरे पर समापà¥à¤¤ होता है। तितली को पकड़ने के लिठजाल को हवा में इस तरह घà¥à¤®à¤¾à¤¯à¤¾ जाता है कि उड़ती हà¥à¤ˆ तितली उसके शरीर को कोई नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाठबिना जालीदार थैले में फंस जाती है।
तितली जाल की मदद से परà¥à¤¯à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤• तितलियों को आसानी से पकड़ सकता है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› समय के लिठथलजीवशाला (टेरेरियम) में रख सकता है जहां उनकी हवा, पानी, à¤à¥‹à¤œà¤¨ और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ जैसी बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ आवशà¥à¤¯à¤•ताà¤à¤‚ पूरी होती हैं। उनके लगातार अवलोकन और परीकà¥à¤·à¤£ के बाद तितलियों को उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में छोड़ दिया जाता है जहां से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤•तà¥à¤° किया गया था।